महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने खुशी और संतोष के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि जो लोग दूसरों की सेवा में अधिक लगे रहते हैं, वे जीवन में अधिक खुश और संतुष्ट दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि वास्तविक सुख ‘मैं’ से बढ़कर ‘हम’ में निहित है। महारानी ने इस विचार को निस्वार्थ भाव से जीने और दूसरों के प्रति उदारता दिखाने से जोड़ा है। यह वक्तव्य व्यक्तिगत पूर्ति और सामुदायिक भावना के महत्व पर प्रकाश डालता है। उनका यह संदेश लोगों को स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई में योगदान करने के लिए प्रेरित करता है। महारानी के इस कथन को जीवन के एक गहरे दर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जो खुशी का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह विचार सेवाभाव और परोपकार को जीवन का सार मानता है।