रूस-यूक्रेन युद्ध, इतिहास की पुनरावृत्ति का एक क्रूर उदाहरण है, खासकर जब अतीत के अपराधों को स्वीकार नहीं किया जाता और दंडित नहीं किया जाता। बाल्टिक देशों ने रूस पर यूक्रेन में वही अत्याचार करने का आरोप लगाया है जो सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन ने दशकों पहले किए थे। स्टालिन के शासन में लाखों लोगों की मौत हुई थी, जिसमें यूक्रेन में 'होलोडोमोर' नामक अकाल भी शामिल है, जिसे कई लोग नरसंहार मानते हैं। वर्तमान में, यूक्रेन में रूसी आक्रमण, नागरिकों पर हमले और जबरन विस्थापन की घटनाओं ने स्टालिन के शासनकाल की याद दिला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, यूक्रेन की संस्कृति और पहचान को नष्ट करने का प्रयास कर रहा है, जो स्टालिन की नीतियों के समान है। इस युद्ध ने यूरोप में सुरक्षा की स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग बढ़ रही है। बाल्टिक देश, जो पहले सोवियत संघ के अधीन थे, रूस के इरादों के प्रति विशेष रूप से सतर्क हैं।