इतिहासकार आर्मंड गोसु के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन का भाग्य यूक्रेन के मोर्चे की स्थिति से नहीं, बल्कि रूस में सामाजिक और आर्थिक स्थिति के बिगड़ने से तय होगा। उनका मानना है कि रूसी अपने जीवन स्तर में गिरावट को ज्यादा समय तक सहन नहीं करेंगे। ज़ेलेंस्की इसी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, युद्ध को रूस में "स्थानांतरित" करके। गोसु ने कहा कि रूस के भीतर की परिस्थितियां ही पुतिन के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। उनका विश्लेषण पूर्व सोवियत क्षेत्र में विशेषज्ञता पर आधारित है। यह युद्ध रूस के भीतर असंतोष को बढ़ा सकता है और शासन परिवर्तन की ओर ले जा सकता है। इसलिए, ज़ेलेंस्की की रणनीति रूस को भीतर से कमजोर करने पर केंद्रित है।