रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को किर्गिस्तान में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं, जिसमें ईरान और भारत के नेता भी शामिल होंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कई सदस्य देश पश्चिम के साथ युद्ध, प्रतिबंधों और व्यापार तनावों का सामना कर रहे हैं। यह सम्मेलन इस गुट के बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व को दर्शाता है। माना जा रहा है कि रूस और चीन इस मंच का उपयोग पश्चिमी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए कर सकते हैं। शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह बैठक मध्य एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि रूस और चीन दोनों ही इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। भारत की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति है।