जाने-माने मनोवैज्ञानिक गेब्रियल रोलॉन ने हाल ही में एक साक्षात्कार में खुशी, यादों के महत्व और वर्तमान में जीने की चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए। उनका मानना है कि अतीत की सुखद यादों को स्वीकार करना स्वाभाविक है, लेकिन यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि वह समय बीत चुका है और उसे वापस नहीं लाया जा सकता। रोलॉन के अनुसार, अतीत में अटके रहने से वर्तमान जीवन की खुशियों का अनुभव करने में बाधा आती है। उन्होंने वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने और भविष्य की ओर देखने के महत्व पर ज़ोर दिया। मनोवैज्ञानिक ने बताया कि यादें हमारी पहचान का हिस्सा ज़रूर हैं, लेकिन वे हमें परिभाषित नहीं करतीं। रोलॉन का मानना है कि खुश रहने के लिए अतीत को स्वीकार कर आगे बढ़ना आवश्यक है। यह साक्षात्कार 'ला नेशन' में प्रकाशित हुआ था।