मनोवैज्ञानिक मैरी डोज़ियर, जो संचय (hoarding) की विशेषज्ञ हैं, बताती हैं कि लोगों को चीजें फेंकने में क्यों कठिनाई होती है। उनका कहना है कि हम अक्सर अपनी पुरानी वस्तुओं को इसलिए रखते हैं क्योंकि वे हमें एक पहचान और स्थिरता की भावना प्रदान करती हैं। ये वस्तुएं हमें याद दिलाती हैं कि हम कहां से आए हैं और हमारी यात्रा क्या रही है। यह एक भावनात्मक लगाव होता है, न कि सिर्फ वस्तुओं का संग्रह। डोज़ियर के अनुसार, अतीत की वस्तुओं को त्यागना, किसी न किसी रूप में, अपने अतीत के एक हिस्से को खोना है। इस वजह से, लोग भावनात्मक रूप से इन वस्तुओं से बंधे रहते हैं और उन्हें छोड़ना मुश्किल पाते हैं। मनोवैज्ञानिक इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न थेरेपी और रणनीतियों का उपयोग करते हैं।