ख़ैबर पख्तूनख्वा (केपी) के मुख्यमंत्री के एक सहायक ने दावा किया है कि प्रांतीय व्यय को कम करने का अधिकार राष्ट्रीय आर्थिक परिषद (एनईसी) के बजाय राष्ट्रीय वित्तीय आयोग (एनएफसी) के पास है। यह बयान प्रांत के वित्तीय संकट के बीच आया है, जहाँ केपी सरकार केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता की मांग कर रही है। सहायक का तर्क है कि एनएफसी ही वह संस्था है जिसके पास प्रांतों के बीच राजस्व वितरण और वित्तीय नियंत्रण से संबंधित अधिकार हैं। उन्होंने एनईसी के हस्तक्षेप को असंवैधानिक बताया। इस मुद्दे पर केंद्र और प्रांतों के बीच तनाव बढ़ सकता है। केपी सरकार का कहना है कि उसे बाढ़ और आतंकवाद से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता है। एनएफसी और एनईसी के बीच अधिकारों को लेकर यह विवाद वित्तीय नीति निर्धारण में जटिलताएँ पैदा कर सकता है।
