पांच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक कर रहे हैं। समिति को एक मामले की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम सौंपा गया था, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट अभी तक पेश नहीं की गई है। आरोपों के अनुसार, समिति के सदस्य करोड़ों रुपये की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण रिपोर्ट में देरी हो रही है। इस मामले ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि धन की मांग के कारण समिति के भीतर मतभेद हैं। सरकार ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है और अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस देरी से पीड़ित परिवारों में निराशा है, जो न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।