पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने चचेरे भाई और दामाद अली (र.अ.) को एक छोटी दुआ सिखाई थी। यह दुआ अनिश्चितता और दुविधा से मुक्ति पाने में मदद करती है। इस दुआ के माध्यम से सही निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त होती है। यह दुआ मुसलमानों को जीवन के महत्वपूर्ण मामलों में मार्गदर्शन प्रदान करती है। माना जाता है कि यह दुआ अल्लाह से सही रास्ता दिखाने की प्रार्थना है। अली (र.अ.) को यह दुआ विशेष रूप से सिखाई गई थी ताकि वह हमेशा सही निर्णय ले सकें और दूसरों का मार्गदर्शन कर सकें। यह दुआ इस्लामी शिक्षाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।