एक प्रोफेसर ने दो महीने तक अपनी दाहिनी आंख में अचानक होने वाली दृष्टि हानि को सहन किया, लेकिन अंततः तीन महीने बाद उनकी मृत्यु हो गई। यह मामला तीव्र दर्द को केवल दर्द निवारक दवाओं से दबाने के खतरों पर प्रकाश डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर द्वारा दिए जा रहे दर्द के संकेतों को अनदेखा करना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। प्रोफेसर को प्रारंभिक अवस्था में चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए थी। उनकी कहानी एक चेतावनी है कि दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए। उचित निदान और उपचार में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।