इस बार के विश्व कप पर अभूतपूर्व खर्च किया गया है, जिससे प्रशंसकों के लिए यात्रा और अन्य खर्चों में भारी वृद्धि हुई है। कई प्रशंसकों का मानना है कि कीमतें बहुत अधिक हैं और यह खेल को आम लोगों की पहुँच से बाहर कर रही हैं। आयोजन समिति का कहना है कि उच्च लागत बुनियादी ढांचे में निवेश और बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए आवश्यक थी। हालांकि, प्रशंसकों की बढ़ती लागत के कारण इस सवाल उठने लगा है कि क्या यह विश्व कप अपनी कीमत के लायक है। यह बहस खेल के भविष्य और इसकी समावेशिता पर भी सवाल उठाती है। क्या फुटबॉल अब केवल अमीरों का खेल बन गया है?
