सरकार बनने के छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक वह घोषणापत्र लागू नहीं हो पाया है जिसका वादा चुनाव के दौरान किया गया था। इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रपति की शक्तियों में भी कोई वृद्धि नहीं हुई है। यह स्थिति राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि राष्ट्रपति की भूमिका और अधिकार भविष्य में क्या होंगे, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि घोषणापत्र को लागू करने से राष्ट्रपति की शक्ति बढ़ सकती है, जबकि अन्य का कहना है कि यह सरकार के नियंत्रण में अधिक फायदेमंद साबित होगा। फिलहाल, राष्ट्रपति का कार्यालय इस मामले पर ध्यान रख रहा है और आगे की कार्रवाई के लिए सरकार के साथ परामर्श कर रहा है। स्थिति की निगरानी की जा रही है, और भविष्य में क्या होता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यह अनिश्चितता राजनीतिक स्थिरता और शासन में पारदर्शिता के लिए चिंता का विषय है।