ऑनलाइन शिकारी पकड़ने के लिए कुछ लोग सोशल मीडिया पर झूठे प्रोफाइल बनाकर काम कर रहे हैं। वे खुद को नाबालिग बताकर संभावित शिकारियों को फंसाते हैं और उनकी बातचीत को रिकॉर्ड करते हैं। फिर, वे पुलिस को जानकारी देते हैं और साथ ही सोशल मीडिया पर शिकारियों के सबूत सार्वजनिक कर देते हैं, जिसमें वीडियो और बातचीत के अंश शामिल होते हैं। विशेषज्ञ इस तरह की गतिविधियों के खतरों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, जबकि पुलिस अनौपचारिक रूप से इन समूहों के साथ सहयोग कर रही है। इस तरह के 'विजिलैंटे' न्याय के कारण कानूनी और नैतिक सवाल उठ रहे हैं। यह प्रक्रिया शिकारियों को पकड़ने में मददगार हो सकती है, लेकिन गोपनीयता और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का जोखिम भी है। इस मामले में सावधानी और कानून का पालन करना आवश्यक है।