विजय प्रशद ने ईरान में राजनीतिक कैदियों पर एक खुले पत्र की आलोचना का बचाव किया है, जो ईरानी सरकार और पश्चिमी साम्राज्यवाद दोनों की आलोचना करता है। यह पत्र ईरानी राजनीतिक कैदियों के साथ एकजुटता का आह्वान करता है। प्रशद का रुख ईरानी शासन के प्रति सहानुभूतिपूर्ण है, जिसने इस वर्ष इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान दसियों हज़ार लोगों की हत्या की थी। आलोचकों का कहना है कि प्रशद ईरानी शासन के लिए एक मुखपत्र के रूप में काम कर रहे हैं। प्रशद का बचाव ईरानी सरकार के प्रति उनकी निरंतर वफ़ादारी को दर्शाता है। इस मामले ने बाएँ बुद्धिजीवियों के बीच बहस छेड़ दी है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर भी प्रकाश डालती है।

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