मध्य जावा के पोल्ट्री व्यवसायियों का मानना है कि 'मुफ्त पौष्टिक भोजन' (MBG) कार्यक्रम के तहत चिकन की खपत अभी तक महत्वपूर्ण स्तर तक नहीं पहुंची है। पोषण पूर्ति सेवा इकाई (SPPG) द्वारा मांस की खरीद से बाजार में कोई बड़ा सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। पशुपालकों के अनुसार, वर्तमान खरीद दरें उनकी उम्मीदों और बाजार की जरूरतों से काफी कम हैं। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के पोषण में सुधार करना है, लेकिन स्थानीय उत्पादकों को अभी तक इसका पूरा लाभ नहीं मिला है। पोल्ट्री क्षेत्र के हितधारक चाहते हैं कि सरकार खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाए। इससे न केवल पोषण लक्ष्यों की प्राप्ति होगी, बल्कि स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। वर्तमान में, इस कार्यक्रम का प्रभाव सीमित नजर आ रहा है।
