साओ जोसे अल्मेडा ने दावा किया था कि पुर्तगाल में आत्म-आलोचना की क्षमता में कमी और एक गहरा मौन मौजूद है। हालांकि, यह दावा पूरी तरह से गलत साबित हुआ है। पुर्तगाल में आत्म-आलोचना की भावना मौजूद है और लोग अपनी राय व्यक्त करने में सक्षम हैं। अल्मेडा का यह बयान तथ्यों पर आधारित नहीं है और इसे निराधार माना जा रहा है। इस दावे से पुर्तगाली समाज में बहस छिड़ गई है, जहाँ कई लोगों ने अल्मेडा के विचारों को खारिज कर दिया है। जांच से पता चला है कि पुर्तगाली नागरिक स्वतंत्र विचार रखने और अपनी आवाज उठाने में सक्रिय हैं। अल्मेडा के बयान को राजनीतिक मकसद से प्रेरित भी माना जा रहा है।