सोशलिस्ट पार्टी (PS) महत्वपूर्ण मतदान से अनुपस्थित रही, जिससे पार्टी की प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं। इस दौरान, पार्टी के भीतर 'PSU' को लेकर बहस छिड़ी है – क्या यह दासता है या समावेशन? राष्ट्रपति ने ध्वजों को वीटो कर दिया, जबकि वेंचुरा ने फ़ोटोशॉप और प्रकाश का उपयोग करते हुए 'धर्मयुद्ध' का मज़ाक उड़ाया। महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, राजनीतिक बहसों में समय बर्बाद किया जा रहा है। विपक्षी दल PS की अनुपस्थिति को आलोचनात्मक बता रहे हैं। यह घटनाक्रम संसदीय कार्यवाही में पार्टी की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के भीतर आंतरिक कलह का संकेत हो सकता है।