पुर्तगाली भाषा, विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी भाषा होने के बावजूद, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में अपेक्षित स्थान नहीं पाती। यह भाषा पुर्तगाल की राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न अंग है और इसकी संस्कृति एवं साहित्य को समृद्ध करती है। प्रसिद्ध कवि लुईस डी कामोएस ने भाषा को राष्ट्र की आत्मा बताया है। वर्तमान में, भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, मात्र एक वार्षिक उत्सव मनाने से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। पुर्तगाली भाषी देशों के बीच सहयोग और भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। भाषा के प्रति उदासीनता राष्ट्रीय विरासत को कमजोर कर सकती है, इसलिए इसे प्राथमिकता देना आवश्यक है। सरकार और नागरिकों दोनों को मिलकर भाषा के विकास के लिए प्रयास करने चाहिए।