राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (INE) के अनुसार, वर्ष की शुरुआत सरकारी बजट में नकारात्मक रही है। पहली तिमाही में 0.7% की राजकोषीय घाटा दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार की आय, व्यय से कम रही है। यह घाटा आर्थिक गतिविधियों और सरकारी नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले महीनों में भी बनी रह सकती है। सरकार इस स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठा सकती है, जिसमें खर्चों में कटौती या राजस्व बढ़ाने के उपाय शामिल हैं। यह घाटा देश की आर्थिक स्थिरता पर प्रभाव डाल सकता है।
