राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (INE) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (IPC) में वार्षिक परिवर्तन दर बढ़कर 3.6% हो गई है। यह पिछले महीने की तुलना में 0.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्शाता है। मुद्रास्फीति में यह वृद्धि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाल सकती है। INE के आंकड़े बताते हैं कि वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए जीवन यापन की लागत बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति आने वाले महीनों में भी जारी रह सकती है। सरकार ने इस बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए कुछ उपाय करने की घोषणा की है। इस स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अर्थव्यवस्था को नकारात्मक रूप से प्रभावित न करे।