राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (INE) के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, जुलाई महीने में मुद्रास्फीति ३% रही। यह जून में दर्ज ३.२% की वृद्धि दर से थोड़ी कमी दर्शाता है। यह लगातार दूसरी महीने है जब मुद्रास्फीति में गिरावट आई है, जो कीमतों में वृद्धि की गति धीमी होने का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति उपभोक्ता खर्च और समग्र आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, अभी भी यह देखना बाकी है कि यह गिरावट दीर्घकालिक है या अस्थायी। सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। यह गिरावट व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत की खबर है।