पोप ने डिजिटल वातावरण में गरीबों के प्रति बढ़ते पूर्वाग्रह पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दुनिया लोगों को कट्टरपंथी बना रही है और गरीबों के प्रति नकारात्मक धारणा को बढ़ावा दे रही है। पोप ने संत फ्रांसिस ऑफ असिसी के उदाहरण का उल्लेख किया, जिन्होंने एक भिखारी के रूप में रोम में जीवन बिताया था। उन्होंने बताया कि संत फ्रांसिस ने अपनी संपत्ति त्यागकर गरीबों के साथ सहानुभूति व्यक्त की थी। पोप का मानना है कि डिजिटल युग में गरीबों की वास्तविक स्थिति को समझना और उनके प्रति करुणा दिखाना और भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाज से गरीबों के प्रति अधिक समावेशी और संवेदनशील होने का आग्रह किया है। यह टिप्पणी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती असमानता और सामाजिक ध्रुवीकरण के संदर्भ में की गई है।
