पोप लियोन XIV ने ऐतिहासिक रूप से दूसरी बार लैम्पेदुसा का दौरा किया और लगभग 4000 लोगों को संबोधित किया। उन्होंने समुद्र में होने वाली मौतों को लिए गए और न लिए गए निर्णयों का परिणाम बताया। पोप ने यूरोप को एक युग-परिभाषित चुनौती का सामना करने की बात कही। यह दौरा प्रवासियों की दुर्दशा और यूरोप की आप्रवासन नीति पर ध्यान केंद्रित करता है। लैम्पेदुसा, भूमध्य सागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप, सालों से प्रवासियों के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार बना हुआ है, जो बेहतर जीवन की तलाश में अफ्रीका से यूरोप आते हैं। पोप का यह दौरा इस गंभीर मानवीय संकट के प्रति सहानुभूति और कार्रवाई का आह्वान है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थी संकट और मानवाधिकारों पर बहस को फिर से तेज कर सकती है।

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