स्पेन के टेनेरीफे में प्रवासियों के साथ एक सभा को संबोधित करते हुए पोप फ्रांसिस ने कहा कि हर कोई किसी न किसी रूप में प्रवासी ही है। उन्होंने प्रवासियों को ‘स्वर्गीय मातृभूमि’ की ओर यात्री बताते हुए यह विचार व्यक्त किया। पोप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मानव जीवन एक यात्रा है और हर व्यक्ति इस यात्रा का हिस्सा है। यह टिप्पणी प्रवासियों की स्थिति और मानवीय एकजुटता के महत्व पर प्रकाश डालती है। पोप फ्रांसिस अक्सर प्रवासियों और शरणार्थियों के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं। उनका यह संदेश वैश्विक स्तर पर प्रवासियों के प्रति सहानुभूति और समझ को बढ़ावा देने का प्रयास है। यह वक्तव्य प्रवास के अनुभव को सार्वभौमिक मानवीय स्थिति से जोड़ता है।