पोप लियोन XIV ने स्पेन के ग्रां कैनरिया की यात्रा के दौरान यूरोपीय सरकारों की प्रवासी नीति पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने प्रवासियों के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। यह टिप्पणी यूरोपीय संघ के नए प्रवासन और शरण समझौते के लागू होने से एक दिन पहले आई है। पोप ने आग्रह किया कि सीमाओं को पार करने वाले लोगों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करने पर जोर दिया। उनका मानना है कि प्रवासियों को मानवीय संकट के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि केवल एक राजनीतिक चुनौती के रूप में। यह बयान यूरोप में प्रवासन नीति पर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण है।