पोप फ्रांसिस ने हाल ही में एक धार्मिक सभा में अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म और युद्ध एक साथ नहीं चल सकते। पोप ने जोर देकर कहा कि जो लोग ईसा मसीह में विश्वास रखते हैं, उन्हें जरूरतमंदों और पीड़ितों की मदद करनी चाहिए, न कि युद्ध को बढ़ावा देना चाहिए। यह टिप्पणी ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति, विशेष रूप से सैन्य हस्तक्षेपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पोप ने स्पष्ट रूप से किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संदेश ट्रंप के लिए स्पष्ट था। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान वैश्विक शांति और मानवीय मूल्यों के प्रति पोप की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।