पोप फ्रांसिस ने पोलिश नागरिकों को सम्बोधित करते हुए धार्मिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा और कैटेचिज़्म विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाएँ और ईश्वर और दुनिया की समझ को गहरा करें। यह बयान पोलैंड में आगामी शैक्षणिक परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। १ सितंबर, २०२६ से, पोलैंड के स्कूलों में धार्मिक कक्षाएं केवल दिन की शुरुआत या अंत में आयोजित की जाएंगी। इस नए नियम का चर्च के उच्च अधिकारियों ने विरोध किया है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे धार्मिक शिक्षा तक विद्यार्थियों की पहुँच कम हो जाएगी। पोप का संदेश इस विषय पर चल रही बहस के बीच आशा की किरण के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा के माध्यम से आध्यात्मिक विकास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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