राष्ट्रपति ने जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सीनेट ने इस प्रस्ताव को दूसरी बार खारिज कर दिया है। यह प्रस्ताव अभी स्पष्ट नहीं है कि किस विषय पर जनमत संग्रह आयोजित किया जाना था। सीनेट के इस निर्णय से राजनीतिक गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राष्ट्रपति अब इस मामले में आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। विपक्ष ने सीनेट के फैसले का स्वागत किया है, जबकि राष्ट्रपति के समर्थक इस फैसले से निराश हैं। यह घटना पोलैंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और भविष्य में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। अब यह देखना होगा कि राष्ट्रपति इस अस्वीकृति पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।