बर्लिन में पोलिश नागरिकों पर हमले के मुद्दे पर पोलैंड की संसद में तीखी बहस हुई। PiS (विधि और न्याय) के सांसद प्रज़्मेस्लाव चर्नेक ने आरोप लगाया कि जर्मन सुरक्षा बलों ने पोलिश देशभक्तों पर बेरहमी से हमला किया और उन्हें पीटा। यह टिप्पणी सीमा रक्षा आंदोलन के सदस्यों के खिलाफ बर्लिन पुलिस की कार्रवाई के संदर्भ में की गई थी। चर्नेक की इस टिप्पणी से संसद में भारी हंगामा मच गया। इस मुद्दे पर क्रिस्टोफ़ पाशिक, रोमन गिएर्टिच और उप प्रधानमंत्री व्लादिसलाव कोसिनियाक-कामिश ने भी अपनी राय रखी। संसद में इस घटना को लेकर तनावपूर्ण माहौल रहा और विभिन्न सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।