पोलिश राजनीति में डिप्टी मिनिस्टर स्ज़ेप्टिकी के UPA (यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी) से संबंधित बयानों को लेकर विवाद गहरा गया है। डोरोटा गावरीलुक ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के भीतर कड़े विकल्पों की बात की है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई व्यक्ति पोलैंड के राष्ट्रीय हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, तो उसे सरकार में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। गावरीलुक ने स्पष्ट किया कि या तो ऐसे बयानों को सहन किया जाए या फिर स्ज़ेप्टिकी को उनके पद से हटा दिया जाए। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि पोलैंड राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से उनकी नीतियों में बदलाव की मांग कैसे कर सकता है, जबकि उनकी अपनी सरकार में यूक्रेनी दृष्टिकोण रखने वाले लोग मौजूद हैं। यह मामला पोलैंड और यूक्रेन के बीच ऐतिहासिक तनावों और वर्तमान राजनीतिक संबंधों को दर्शाता है। गावरीलुक का यह बयान सरकार के भीतर आंतरिक मतभेदों और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा की आवश्यकता पर जोर देता है।