वेनिस आयोग ने पोलैंड में न्यायाधीशों को दंडित करने संबंधी राष्ट्रपति के प्रस्ताव का मूल्यांकन किया है। आयोग की बुधवार को जारी राय के अनुसार, यह प्रस्ताव न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए एक स्पष्ट खतरा है। आयोग का कहना है कि यह मौजूदा गतिरोध को हल करने का उपाय नहीं है। प्रस्तावित कानून, न्यायालय में मामले की सुनवाई के अधिकार को बहाल करने और अनावश्यक देरी से बचने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि, आयोग का मानना है कि यह कानून न्यायाधीशों पर अनुचित दबाव डाल सकता है। इस मूल्यांकन से पोलैंड में न्यायिक सुधारों पर चल रही बहस और तेज हो सकती है। आयोग की रिपोर्ट में इस प्रस्ताव के संभावित नकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला गया है।
