एक प्रमाणित डॉक्टर ने अन्ना को डिम्बग्रंथि के कैंसर के लिए एक "थेरेपी" के लिए भेजा। यह थेरेपी एक निर्माण कंपनी की कर्मचारी द्वारा दी जा रही थी जिसके पास कोई मेडिकल प्रशिक्षण नहीं था। चौंकाने वाली बात यह है कि "दवा" के रूप में एक पेंट विलायक को नसों में इंजेक्ट किया गया था। अन्ना इस इलाज से बाल-बाल बची। यह मामला एक पत्रकारिता जांच का हिस्सा है, जिसका दूसरा भाग "टेस्टामेंट" नामक एक श्रृंखला में सुना जा सकता है। जांच में पता चला है कि एक डॉक्टर ने जानबूझकर एक खतरनाक और अप्रमाणित इलाज को मंजूरी दी। इस लापरवाही के कारण मरीज की जान खतरे में पड़ गई और यह मेडिकल नैतिकता का गंभीर उल्लंघन है। अधिकारियों ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।