पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने यह निर्धारित किया है कि राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकारियों के चयन के संबंध में अब प्रधानमंत्री के प्रति-हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी। यह निर्णय पूर्व की प्रथा को बदल देता है और न्यायपालिका के शीर्ष अंगों को गठित करने के मामले में राष्ट्रपति की स्वतंत्रता को बढ़ाता है। इस फैसले से राष्ट्रपति को न्यायिक नियुक्तियों में पूर्ण अधिकार मिल गए हैं। न्यायालय के एक न्यायाधीश ने इस फैसले से असहमति व्यक्त की है, उनका मानना है कि न्यायालय ने राष्ट्रपति के अधिकारों का अनुचित विस्तार किया है। यह फैसला पोलैंड की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।