वेनिस कमीशन ने राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित एक नए विधेयक पर अपनी आधिकारिक राय व्यक्त की है। यह विधेयक अदालतों में मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी को समाप्त करने और न्यायिक अधिकारों को बहाल करने से संबंधित है। कमीशन ने इस परियोजना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकारों के बुनियादी मानकों के विपरीत पाया है। बैठक में शामिल उपमंत्री डारियस माज़ुर ने पुष्टि की कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा नहीं उतरता। सांसद पावेल स्लिज़ ने भी इस राय को अत्यंत निराशाजनक और विनाशकारी बताया है। यह मामला अब कानूनी और मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर सवालों के घेरे में है। कमीशन का यह निर्णय विधेयक की वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।