पपुआ न्यू गिनी में प्रधानमंत्री ने हाल ही में घोषणा की थी कि भविष्य में सरकारी अनुबंधों और भर्तियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग किया जाएगा। इस घोषणा के बाद, विशेषज्ञों और नागरिकों ने इस नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बजाय वास्तविक बुद्धिमत्ता और मानवीय कौशल की अधिक आवश्यकता है। आलोचकों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अत्यधिक निर्भरता से पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। यह भी चिंता जताई जा रही है कि इससे स्थानीय प्रतिभा का विकास बाधित हो सकता है। इस मुद्दे पर आगे बहस होने की संभावना है, क्योंकि सरकार अपनी नई नीति को लागू करने की तैयारी कर रही है। यह जानकारी 'पोस्ट कुरियर' में प्रकाशित हुई है।
