मंडला थिएटर में प्रस्तुत नाटक ‘लाہوری भैंस’ सत्ता और विशेषाधिकार के नाजुक ढांचे को उजागर करता है। नाटक एक साधारण खरीददारी के इर्द-गिर्द घूमता है, जो शक्ति के समीकरणों को बदल देती है। यह नाटक शक्तिशाली लोगों के सामने एक भैंस के आने से उत्पन्न होने वाली स्थितियों पर केंद्रित है, जो उनके प्रभाव को चुनौती देती है। नाटक में सामाजिक असमानता और वर्ग भेद पर भी कटाक्ष किया गया है। कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से पात्रों को चित्रित किया है, जिससे दर्शकों को सोचने पर मजबूर होना पड़ता है। यह प्रस्तुति दर्शकों को सत्ता के दुरुपयोग और सामाजिक न्याय के महत्व पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। कुल मिलाकर, ‘लाہوری भैंस’ एक विचारोत्तेजक और प्रभावशाली नाटक है।