महिला विश्व कप में खिलाड़ियों द्वारा गुलाबी रंग के जूतों का इस्तेमाल एक ट्रेंड बन गया है। नाइकी ने इसके पीछे का कारण मैदान के साथ रंग का विरोधाभास बताया है, लेकिन यह तर्क पूरी तरह से मान्य नहीं है क्योंकि मैदान हमेशा हरे रंग का ही रहा है। इस फैसले के पीछे की असली वजह एक रिपोर्ट में छिपी है। यह रिपोर्ट जूतों की बिक्री बढ़ाने के लिए एक मार्केटिंग रणनीति का संकेत देती है। खेल विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम खेल के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देता है। इस ट्रेंड ने खेल जगत में बहस छेड़ दी है, जहां कुछ लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखते हैं, वहीं अन्य इसे अनावश्यक प्रचार मानते हैं। इस मामले में आगे की जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।
