क्लिपरटन द्वीप पर एक समय जंगली सूअरों की संख्या बहुत अधिक हो गई थी, जिससे वहां के समुद्री पक्षियों और भूमि केकड़ों को भारी नुकसान पहुंचा था। पक्षीविज्ञानी केनेथ स्टेजर ने 1958 में द्वीप से 58 सूअरों को हटा दिया, जिसके बाद पारिस्थितिकी तंत्र धीरे-धीरे ठीक होने लगा। इस हस्तक्षेप के कारण पक्षियों की आबादी 650 से बढ़कर 137,000 से अधिक हो गई। हालांकि, बाद में द्वीप पर काले चूहे आ गए, जिन्होंने वनस्पति और पक्षी आबादी को फिर से नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। क्लिपरटन द्वीप की कहानी द्वीपों पर आक्रामक प्रजातियों के गंभीर पर्यावरणीय प्रभावों को दर्शाती है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे एक प्रजाति को हटाने से पारिस्थितिक संतुलन बहाल हो सकता है, लेकिन नए आक्रमणों से सतर्क रहना आवश्यक है। इस द्वीप का अध्ययन पारिस्थितिक प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण सबक प्रदान करता है।