सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते के महाभियोग मामले में मतदान की दो-तिहाई आवश्यकता की व्याख्या को चुनौती देने वाली अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सीनेट इम्पीचमेंट कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध याचिका दायर की गई थी। अदालत ने कहा कि सीनेट ने संविधान के अनुसार सही व्याख्या की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दो-तिहाई का मतलब संसद के सभी सदस्यों का दो-तिहाई होना चाहिए, जबकि सीनेट ने केवल उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई को पर्याप्त माना था। सुप्रीम कोर्ट ने सीनेट के फैसले को बरकरार रखा है, जिसका अर्थ है कि उपराष्ट्रपति दुतेर्ते के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए सीनेट में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इस फैसले से महाभियोग की कार्यवाही पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।