हाल ही में, सियोल में एक अस्पताल वाली इमारत में 36 करोड़ वोन (लगभग 2.1 करोड़ रुपये) का 'हक़ीक़त शुल्क' (key money) देकर एक दवा दुकान खरीदी गई थी। दो महीने के भीतर ही, उसी इमारत में स्थित अस्पताल को बंद कर दिया गया है। इस घटना ने 'हक़ीक़त शुल्क' की अत्यधिक राशि और इसके उचित उपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल बंद होने से दवा दुकान के मालिक को भारी नुकसान हुआ है। इस मामले में, 'हक़ीक़त शुल्क' की पारदर्शिता और विनियमन की आवश्यकता पर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक 'हक़ीक़त शुल्क' छोटे व्यवसायों के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है। इस घटना ने कोरियाई वाणिज्यिक संपत्ति बाजार में 'हक़ीक़त शुल्क' की प्रथा पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है।