न्यूज़ीलैंड में, विदेश मंत्री विंस्टन पीटरस ने महामारी की रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र में मतदान पर अपने ही मंत्रिमण्डल के अधिकांश सदस्यों की इच्छा के विरुद्ध फैसला लिया। मंत्रिमण्डल में महामारी की रोकथाम पर घोषणा के पक्ष में मतदान करने की प्रबल इच्छा थी, लेकिन इस मामले में मंत्रिमण्डल के किसी फैसले की आवश्यकता नहीं थी। पीटरस ने स्वतंत्र रूप से यह निर्णय लिया, जिसे ‘कप्तान का कॉल’ कहा गया है। इस घटना से न्यूज़ीलैंड की विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर सरकार के भीतर मतभेद उजागर हुए हैं। यह स्पष्ट है कि विदेश मंत्री को इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार था, जिसके कारण वह अपने सहयोगियों की राय को दरकिनार करने में सक्षम रहे। इस कदम से भविष्य में इसी तरह के मुद्दों पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं। यह घटना न्यूज़ीलैंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

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