मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच की कमी के कारण महिलाएं और लड़कियां गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। कई महिलाएं मोज़े को सैनिटरी पैड के रूप में इस्तेमाल करने, टैम्पोन को सामान्य से अधिक समय तक पहनने और यहां तक कि सुपरमार्केट से उत्पाद चोरी करने जैसे उपाय करने के लिए मजबूर हो रही हैं। यह स्थिति, जिसे ‘मासिक धर्म गरीबी’ कहा जा रहा है, आर्थिक तंगी और स्वच्छता उत्पादों की उच्च लागत के कारण उत्पन्न हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और गरिमा को प्रभावित करती है। इस समस्या के समाधान के लिए सस्ती और सुलभ स्वच्छता उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकारों और सामाजिक संगठनों को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए ताकि किसी भी महिला को मासिक धर्म के दौरान बुनियादी स्वच्छता से वंचित न रहना पड़े। यह एक मानवीय मुद्दा है जिस पर ध्यान देना जरूरी है।