एक 37 वर्षीय कानूनी सहायता कर्मी ने अदालत में स्वीकार किया है कि उसने एक भगोड़े किशोर हत्यारे को भागने में मदद की। उस पर न्याय प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप सिद्ध हुआ है। यह कर्मी उस होटल में गिरफ्तार हुई थी जहाँ वह इस हत्यारे के साथ मिली थी, जिसने अपनी पैरोल की शर्तों का उल्लंघन कर दिया था। जांच में पता चला कि कर्मी ने हत्यारे को छिपाने और भागने में सक्रिय रूप से सहायता की। अदालत में उसने अपना अपराध स्वीकार किया और अब उसे सजा का सामना करना पड़ेगा। यह मामला पैरोल प्रणाली और कानूनी सहायता कर्मियों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
