मारिन मोंटागुत ने अपनी चौथी पुस्तक ‘मोन पैरिस दे तुजूर’ (Mon Paris de toujours) के माध्यम से पेरिस के उन छिपे हुए पहलुओं को उजागर किया है जिन्हें स्थानीय लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं। Toulouse में जन्मे इस लेखक ने स्वयं ही पेरिस की गलियों में घूम-घूम कर इस पुस्तक के लिए सामग्री जुटाई है। यह पुस्तक शहर के उन स्थानों और कहानियों को समर्पित है जो अक्सर पर्यटकों की नजरों से ओझल रह जाती हैं। मोंटागुत का यह कार्य पेरिस के प्रति उनके प्रेम और शहर के सौंदर्य के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। यह पुस्तक पेरिसवासियों को अपने शहर को नए सिरे से देखने के लिए प्रेरित करेगी। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो पेरिस की आत्मा को खोजने के लिए निकला और सफल रहा। उनकी पिछली रचनाओं की तरह, यह पुस्तक भी पेरिस के प्रति एक अनूठा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
