फ्रांस और पैराग्वे के बीच हुए मैच में पैराग्वे ने आक्रामक खेल खेलने के बजाय पूरी तरह से रक्षात्मक रणनीति अपनाई। उन्होंने शुरुआत से ही लगातार फाउल करके और समय बर्बाद करके फ्रांसीसी खिलाड़ियों को परेशान करने की कोशिश की। विश्लेषकों ने पैराग्वे की इस रणनीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'एंटी-फुटबॉल' बताया है। उनका मानना है कि पैराग्वे का उद्देश्य सिर्फ़ फ्रांसीसी खिलाड़ियों को रोकना था, न कि खेल खेलना। कुछ विश्लेषकों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी को एमबाप्पे को चोट पहुँचाने की आवश्यकता थी? इस रणनीति के कारण मैच में रोमांच की कमी रही और दर्शकों को निराशा हुई। कुल मिलाकर, पैराग्वे की रक्षात्मक रणनीति सफल नहीं रही और फ्रांस ने मैच जीत लिया।