1976 के यूरोपीय चैम्पियनशिप के फाइनल में चेकोस्लोवाकिया के मिडफील्डर ने एक अविस्मरणीय पेनल्टी किक मारकर इतिहास रच दिया। यह गोल, जिसे पैनेंका के नाम से जाना जाता है, फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित पलों में से एक बन गया है। खिलाड़ी ने इस ऐतिहासिक क्षण के 50 वर्ष पूरे होने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि इस गोल से उन्हें कोई रॉयल्टी नहीं मिलती, लेकिन यह उनके लिए गर्व की बात है। पैनेंका की इस पेनल्टी ने चेकोस्लोवाकिया को चैम्पियनशिप जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह गोल खेल की चतुराई और साहस का प्रतीक माना जाता है और आज भी युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करता है।