पुरानी और दुर्लभ पुस्तकों के विक्रेताओं ने बड़ी मात्रा में खरीद के ऑर्डर प्राप्त किए हैं, जिससे डर है कि ये पुस्तकें डिजिटल करने की प्रक्रिया में नष्ट कर दी जाएंगी। यह मामला ‘पनामा परियोजना’ नामक एक पहल से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को प्रशिक्षित करने के लिए पुस्तकों का उपयोग किया जा रहा है। दुर्लभ पुस्तकों को खरीदने के पीछे का उद्देश्य उन्हें स्कैन करके डेटासेट बनाना है, जिसका उपयोग AI मॉडलों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। कई पुस्तकालयाध्यक्षों और पुस्तक संग्राहकों ने इस प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि इससे सांस्कृतिक विरासत का नुकसान हो सकता है। वे तर्क देते हैं कि पुस्तकों को नष्ट करने के बजाय उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। इस परियोजना ने AI विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच एक महत्वपूर्ण नैतिक सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI प्रशिक्षण के लिए अन्य डेटा स्रोतों का उपयोग करने पर विचार किया जाना चाहिए।