पाकिस्तान सरकार राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद खुदरा और पेट्रोलियम क्षेत्रों को कर दायरे में लाने में विफल रही है। वित्तीय चुनौतियों के बीच, ये दोनों क्षेत्र अभी भी करों से मुक्त हैं, जिससे सरकार की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इन क्षेत्रों पर कर लगाने की वकालत की थी, लेकिन राजनीतिक और अन्य कारणों से यह संभव नहीं हो पाया। सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों पर कर लगाने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और आम लोगों पर बोझ पड़ सकता है। राजस्व संग्रह में सुधार के लिए सरकार अन्य उपायों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें कर चोरी रोकना और कर आधार का विस्तार करना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा और पेट्रोलियम क्षेत्रों को कर दायरे में लाना पाकिस्तान की वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।