16 अक्टूबर, 1951 को, लियाकत अली खान ने अपने परिवार को कराची में छोड़कर रावलपिंडी के लिए उड़ान भरी थी, जहाँ उनका इरादा देश को संबोधित करने का था। दुर्भाग्यवश, वह कभी ऐसा करने में सफल नहीं हो पाए। रावलपिंडी में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए जाते समय उनकी हत्या कर दी गई। यह घटना पाकिस्तान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जिसने राजनीतिक अस्थिरता और शोक का माहौल पैदा किया। लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री थे और उनकी हत्या ने देश को गहरा सदमा पहुँचाया। इस घटना की जांच हुई, लेकिन हत्यारों को कभी भी पूरी तरह से न्याय के कटघरे में नहीं लाया जा सका। उनकी विरासत आज भी पाकिस्तान में याद की जाती है। यह दुखद घटना पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास का एक अभिन्न अंग है।