अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान सरकार द्वारा रियल एस्टेट क्षेत्र को कर राहत देने के प्रस्ताव का विरोध किया है। पाकिस्तान सरकार, राजस्व बढ़ाने के लक्ष्यों को पूरा करने में चुनौतियों का सामना करते हुए, संपत्ति करों में छूट देकर निवेश को प्रोत्साहित करने की उम्मीद कर रही थी। IMF का मानना है कि इस तरह की छूट से सरकारी राजस्व में कमी आएगी और पहले से ही नाजुक वित्तीय स्थिति और खराब हो जाएगी। पाकिस्तान वर्तमान में IMF से एक बेलआउट पैकेज प्राप्त कर रहा है, जिसके तहत उसे कुछ आर्थिक सुधार करने की आवश्यकता है। IMF ने स्पष्ट किया है कि वह कर राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहा है, न कि उसे कम करने पर। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन IMF के अड़ियल रुख से पाकिस्तान सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि IMF के विरोध के कारण सरकार को अपनी कर नीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।